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राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने असम पुलिस से फ़र्ज़ी एंकाउंटर मामले में रिपोर्ट माँगी।

असम पुलिस पर ‘मुठभेड़ की होड़’ और मानवाधिकारों के घोर उल्लंघन का आरोप लगाया गया था। शिकायत को लेते हुए NHRC ने अपनी रजिस्ट्री को शिकायत की एक प्रति DGP को भेजने का निर्देश दिया

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The National Human Rights Commission (NHRC) has sought a report from the Assam Police in the fake encounter case.

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने मंगलवार को असम पुलिस द्वारा फर्जी मुठभेड़ की शिकायत पर पुलिस महानिदेशक से चार सप्ताह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट (एटीआर) मांगी है। असम के रहने वाले नई दिल्ली के वकील आरिफ जवादर ने एनएचआरसी में शिकायत दर्ज कराई जिसमें असम पुलिस पर ‘मुठभेड़ की होड़’ और मानवाधिकारों के घोर उल्लंघन का आरोप लगाया गया था। शिकायत को लेते हुए NHRC ने अपनी रजिस्ट्री को शिकायत की एक प्रति DGP को भेजने का निर्देश दिया जिसमें उनसे चार सप्ताह के भीतर ATR की मांग की गई थी। आयोग ने डीजीपी से यह भी पूछा है कि क्या उन्हें राज्य मानवाधिकार आयोग से तत्काल मामले में कोई नोटिस, आदेश आदि प्राप्त हुआ है ! एनएचआरसी ने डीजीपी को भेजे पत्र में कहा, “यदि हां, तो आदेश की एक प्रति चार सप्ताह के भीतर आयोग को भी भेजी जाए।” वहीं राज्य आयोग को भी जवाब देने के लिए चार महीने का समय दिया गया है। असम मानवाधिकार आयोग ने पुलिस गोलीबारी में कई आरोपियों के मारे जाने की मीडिया रिपोर्टों का स्वत: संज्ञान लिया था, जिसमें गृह और राजनीतिक विभाग के प्रमुख सचिव से उन तथ्यों और परिस्थितियों का पता लगाने के लिए जांच का आदेश देने को कहा गया था जिनके कारण मुठभेड़ हुई थी। रेपोर्टों में कहा गया है की आरोपियों ने भागने की कोशिश की और घायल हो गए या मारे गए। 10 जुलाई को अधिवक्ता ने अपनी शिकायत के माध्यम से दावा किया कि घायल या मृत आरोपी उग्रवादी नहीं थे और इसलिए पिस्तौल का उपयोग करने के लिए प्रशिक्षित नहीं थे और यह संभावना नहीं थी कि वे प्रशिक्षित पुलिसकर्मियों से पिस्तौल छीन सकते हैं। पुलिस मुठभेड़ में घायल एक आरोपी के परिवार के सदस्य ने भी यह कहते हुए निचली अदालत का रुख किया था कि यह फर्जी मुठभेड़ थी। सूत्रों के मुताबिक, इस साल मई में नई सरकार के गठन के बाद से पुलिस हिरासत से भागने की कोशिश में कम से कम दो दर्जन आरोपी मारे गए हैं और तीन दर्जन से अधिक घायल हुए हैं।

Disclaimer: This post has been auto-published from an agency news helpline feed without any modifications to the text and has not been reviewed by an editor

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