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सुप्रीम कोर्ट ने श्री पद्मनाभ स्वामी मंदिर के ऑडिट को तीन महीने में करने का आदेश दिया

सुप्रीम कोर्ट के विगत वर्ष के आदेश में छूट देने के लिए विगत दिनों श्री पद्मनाभ स्वामी मंदिर ट्रस्ट द्वारा आवेदन डाला गया था। अपने आज के आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने आगामी तीन महीनों में ऑडिट कराने का आदेश भी दिया। ज्ञात हो कि विगत शुक्रवार 17 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के बाद आदेश को रिजर्व रख लिया था।  

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Supreme Court orders audit of Sri Padmanabha Swamy temple in three months

 केरल के तिरुवनंतपुरम में स्थित श्री पद्मनाभ स्वामी मंदिर को 25 साल के ऑडिट से छूट देने के लिए श्री पद्मनाभ स्वामी मंदिर ट्रस्ट द्वारा दायर आवेदन को आज 22 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया। ज्ञात हो कि सुप्रीम कोर्ट ने विगत वर्ष देश के धनी मंदिरों में से एक श्री पद्मनाभ स्वामी मंदिर के ट्रस्ट के 25 साल के आय-व्यय का आडिट करने का आदेश दिया था।

सुप्रीम कोर्ट के विगत वर्ष के आदेश में छूट देने के लिए विगत दिनों श्री पद्मनाभ स्वामी मंदिर ट्रस्ट द्वारा आवेदन डाला गया था। अपने आज के आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने आगामी तीन महीनों में ऑडिट कराने का आदेश भी दिया। ज्ञात हो कि विगत शुक्रवार 17 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के बाद आदेश को रिजर्व रख लिया था।  

अपने आज के आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पिछले साल उसके द्वारा दिए गए ऑडिट का आदेश केवल मंदिर तक ही सीमित नहीं था बल्कि ट्रस्ट के ऑडिट से भी सम्बद्ध था। इस तरह यह ऑडिट की प्रक्रिया प्रिफ़ेन्स में रख कर आगामी 3 महीने में पूरा किया जाना चाहिए। 

उच्चतम न्यायालय में जस्टिस यूयू ललित, जस्टिस एस. रविंद्र भट और जस्टिस बेला त्रिवेदी की पीठ ने श्री पद्मनाभ स्वामी मंदिर ट्रस्ट द्वारा डाली गई याचिका की सुनवाई की। ज्ञात हो कि तिरुअनंतपुरम स्थिति मंदिर के दैनिक मामलों का प्रबंधन करने के लएि तत्कालीन त्रावणकोर शाही परिवार ने ट्र्स्ट का गठन किया था। शीर्ष अदालत ने पिछले साल मंदिर के लिए एक प्रशासनिक समिति का गठन भी किया था।

ज्ञात हो कि सुप्रीम कोर्ट में डाली गई याचिका में इसी प्रशासनिक समिति की तरफ से दलील पेश करते हुए वकील आर बसंत ने कहा था कि मंदिर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। उसका प्रतिमाह का खर्चा 1.25 करोड़ है, जबकि उसकी मासिक आय कोरोना महामारी के कारण उत्पन्न स्थित के कारण 60 से 70 लाख रुपए के बीच ही हो रही है। इसलिए ट्रस्ट को खर्चे को पूरा करने में मदद करनी चाहिए।

दूसरी तरफ ट्रस्ट के वकील अरविंद दतार का कहना था कि शाही परिवार की तरफ से गठित सार्वजनिक ट्रस्ट का मंदिर के प्रशासनिक मामलों से कुछ लेना-देना नहीं है। ट्रस्ट का गठन शाही परिवार से जुड़े पूजा पाठ और धार्मिक अनुष्ठान की देखरेख के लिए किया गया था। उमंदी है कि सुप्रीम कोर्ट का ऑडिट का आदेश इन विवादों पर भी विराम लगाएगा।

Disclaimer: This post has been auto-published from an agency news helpline feed without any modifications to the text and has not been reviewed by an editor

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