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आंध्र प्रदेश सरकार ने रद्द की कक्षा 10वीं और 12वीं बोर्ड की परीक्षा,सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी के बाद

आंध्र प्रदेश सरकार ने गुरुवार को राज्य में कक्षा 10वीं और 12वीं बोर्ड की परीक्षा को रद्द करने का निर्णय लिया है। सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी के बाद यह फैसला लिया यह जानकारी आंध्र प्रदेश के शिक्षा मंत्री ऑडिमुलपु सुरेश ने दी। 24 जून को सुप्रीम कोर्ट (एससी) ने कहा था कि राज्य सरकार को 31 जुलाई से पहले परीक्षा संबंधी मूल्यांकन नीति पर काम करना होगा। इससे पहले गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने राज्य बोर्डों को निर्देश दिया कि वो आज से 10 दिनों के अंदर आंतरिक मूल्यांकन के लिए अपनी प्रणाली को अधिसूचित करें और सीबीएसई और आईसीएसई दोनों परीक्षाओं के परिणाम 31 जुलाई तक घोषित करें।

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Andhra Pradesh government canceled class 10th and 12th board exams after Supreme Court warning

आंध्र प्रदेश सरकार ने गुरुवार को राज्य में कक्षा 10वीं और 12वीं बोर्ड की परीक्षा को रद्द करने का निर्णय लिया है। सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी के बाद यह फैसला लिया यह जानकारी आंध्र प्रदेश के शिक्षा मंत्री ऑडिमुलपु सुरेश ने दी।  24 जून को सुप्रीम कोर्ट (एससी) ने कहा था कि राज्य सरकार को 31 जुलाई से पहले परीक्षा संबंधी मूल्यांकन नीति पर काम करना होगा।  इससे पहले गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने राज्य बोर्डों को निर्देश दिया कि वो आज से 10 दिनों के अंदर आंतरिक मूल्यांकन के लिए अपनी प्रणाली को अधिसूचित करें और सीबीएसई और आईसीएसई दोनों परीक्षाओं के परिणाम 31 जुलाई तक घोषित करें।  आंध्र प्रदेश के शिक्षा मंत्री ने कहा, ‘आंध्र प्रदेश बोर्ड ऑफ इंटरमीडिएट शिक्षा के अधिकारियों के साथ परामर्श करने के बाद परीक्षा को रद्द करने का निर्णय लिया गया है क्योंकि अधिकारियों ने बताया कि परीक्षा आयोजित करने, मूल्यांकन और परिणाम घोषित करने में कम से कम 40 दिन लगेंगे। इसके अलावा छात्रों को परीक्षा कार्यक्रम के बारे में 15 दिन पहले सूचित करना होगा। 31 जुलाई से पहले इतने कार्यक्रम में परीक्षा आयोजित करना संभव नहीं है। वैकल्पिक ग्रेडिंग पद्धति की घोषणा जल्द ही की जाएगी।’ इस बीच, शीर्ष अदालत ने आंध्र प्रदेश सरकार को जुलाई के अंतिम सप्ताह में अस्थायी रूप से कक्षा 12 के लिए फीजिकल परीक्षा आयोजित करने के अपने फैसले पर चेतावनी दी। प्रति हॉल केवल 15 छात्र रखने के सरकार के फैसले पर तंज कसते हुए , जस्टिस एएम खानविलकर और दिनेश माहेश्वरी ने सवाल उठाया कि सरकार 28,000 से अधिक कमरों की व्यवस्था कैसे कर करेगी, क्योंकि परीक्षा में लगभग 5 लाख छात्रों के बैठने की आशा है। पीठ ने इस दौरान इस बात पर भी चिंता जताई कि परीक्षा के समय किस तरह से कोरोना प्रोटोकॉल का पालन किया जाएगा। छात्रों की संख्या के मुताबकि, राज्य सरकार को कम से कम 30,000 परीक्षा हॉल की जरूरत होगी और अदालत ने संदेह किया कि क्या यह संभव है। सुप्रीम कोर्ट ने वाईएसआरसी-सरकार के प्रतिनिधि से पूछा कि क्या उनके पास यह दिखाने के लिए कोई ठोस वजह है कि परीक्षा का आयोजन सुरक्षित रूप से किया जा सकता है। पीठ ने यह कहते हुए भी अपनी चिंता व्यक्त की कि जुलाई के अंतिम सप्ताह के दौरान क्या होगा, ये कुछ निश्चित नहीं है क्योंकि संभावित कोरोना की तीसरी लहर की खबरें सामने आ रही हैं।

Disclaimer: This post has been auto-published from an agency news helpline feed without any modifications to the text and has not been reviewed by an editor

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